Monday, 28 November 2011

संविधान में अल्पसंख्यक की परिभाषा

संविधान में अल्पसंख्यक की परिभाषा

धर्मनिर्पेक्षता की आड़ में सच को चर गई सच्चर समिति तथा सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रहे रंगनाथ मिश्र ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की ही धज्जियां उड़ा दीं
राजेन्द्र सच्चर समिति ने अल्पसंख्यकों के पिछड़ेपन पर अपनी रिपोर्ट ४०४ पृष्ठों में भारत सरकार को प्रस्तुत की है। वास्तविकता यह है कि भारतीय सविधान में और कानून में अल्पसंख्यक शब्द की परिभाषा ही नहीं हैं। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भी मुसलमानों को अल्पसंख्यक नहीं माना यद्यपि इस आदेश पर खण्डपीठ का स्थगनादेश है। अनुच्छेद २९ व ३० में अल्पसंख्यक हितों के लिए विशेष भाषा व संस्कृति वाले नागरिकों को अपनी भाषा, संस्कृति या लिपि बनाए रखने के लिए अपनी शिक्षा संस्थाएं चालाने ओर प्रशासन करने के भी अधिकार दिए गये है। परन्तु अल्पसंख्यक कौन हैं इसे परिभाषित नहीं किया गया।
२००१ की जनगणना के अनुसार भारत में मुस्लिम जनंसख्या १३-४२ प्रतिशत है जबकि उत्तर प्रदेश में यह प्रतिशत १८-५ है। १९५१ से २००१ तक हिन्दू जनसंख्या ९ प्रतिशत घटी जबकि मुस्लिम जनसंख्या ३ प्रतिशत बढ़ी। १९५१ में हिन्दू ८७-२४ प्रतिशत व मुस्लिम १०-४३ प्रतिशत थे। २००१ में हिन्दू ८४-१२ प्रतिशत ओर मुस्लिम १३-४२ प्रतिशत हो गए।

राष्ट्र भक्ति ले ह्रदय में खड़ा हो देश सारा , संकटों पर मात कर यह राष्ट्र विजयी हो हमारा
  
संविधान सभा के ऐतिहासिक निर्णयः

संविधान सभा द्वारा सरदार पटेल की अध्यक्षता में अल्पसंख्यक अधिकार संबंधी समिति बनाई गई थी। पी०सी० देशमुख ने २७ अगस्त १९४७ को इस समिति के सामने कहा अल्पसंख्यक से अधिक क्रूरतापूर्ण और कोई शब्द नहीं है। अल्पसंख्यक रूपी शैतान के कारण ही भारत देश बँट गया। एस. नागप्पा ने कहा अल्पसंख्यक बहुत समय से हमारी स्वतन्त्रता का मार्ग रोके थे। मुस्लिम सदस्य वी. पोकर ने मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र की माँग की थी और कहा कि मुसलमान सुसंगठित व शक्तिशाली हैं, यदि उन्हें लगा कि उनकी सुनवाई नहीं होगी तो वे उद्दण्ड हो जायेंगे।
संविधान सभा (२४.२६ मई १९४९) ने अल्पसंख्यक आरक्षण को गलत ठहराया मौ० इस्माइल ने मुस्लिम आरक्षण पर पुनर्चिचार की माँग की। संविधान सभा उपाध्यक्ष एच०सी० मुखर्जी न कहा यदि हम एक राष्ट्र चाहते हैं तो हम मजहब के आधार पर अल्पसंख्यक को मान्यता नहीं दे सकते। तजम्मुल हुसैन ने कहा हम अल्पसंख्यक नहीं हैं, यह शब्द अंग्रेजों की देन है, इसे शब्दकोश से हटा देना चाहिए। संविधान सभा में तजम्मुल हुसैन, मौलाना हरसत मोहाना और बेगम एजाज रसूल ने गैर साम्प्रदायिक राष्ट्रराज्य की पैरवी की। कुछ मुस्लिम सदस्यों ने मुस्लिमों के लिए विशेष रक्षा कवच की मांग की। अपत्तियों का उत्तर देते हुए सरदार पटेल ने कहा जो अल्मपत देश विभाजन करा सकता है वह कभी अल्पमत नहीं हो सकता। आप अतीत को भूल जाइए, यदि ऐसा संभव नहीं है तो आप अपनी पसंद के सर्वोत्तम स्थान (पाकिस्तान) चले जाइए। पं० नेहरू ने कहा मजहब आधारित अल्पसंख्यक बहुसंख्यक वर्गीकरण नहीं किया जा सकता है।
भारतीय मुसलमानों की दशा व दिशा पर सच्चर समिति की रिपोर्टः
जस्टिम राजेन्द्र सच्चर समिति की रिपोर्ट कुल ४०४ (चार सौ चार) पृष्ठों में है। सच्चर समिति ने अपनी आख्या (रिपोर्ट) में मुसलमानों के विषय में जो संस्तुति की हैं उनमें कुछ प्रमुख आख्याएं यहाँ दी जा रही हैं:-
उसके अनुसार मुस्लिम समाज को कुल तीन वर्गो में बाँटा गया है-
अशरफः ये विदेशी मूल के मुसलमान हैं जिनके पूर्वज वास्तव में आक्रमणकारी मुस्लिम सेना के साथ आए थे और जो बाद में पीढ़ी दर पीढ़ी भारत में ही बसे हुए हैं।
अरजालः अरजाल मुसलमान वे हैं जिनके पूर्वज उच्च वर्ग के हिन्दू (ब्राह्मण, राजपूत आदि) थे और जिन्हें इस्लाम धर्म में बलात्* सम्मिलित कराया गया था।
अजलाफः अजलाफ मुसलमान वे हैं जो दलित और पिछड़े वर्ग से है।
सच्चर समिति के अनुसार मुसलमानों का नेतृत्व केवल उच्च वर्ग के मुसलमानों के हाथों में चला आ रहा है, जिसे दलित व पिछड़े मुस्लिमों के हाथों में परिवर्तित कराया जाना बहुत आवश्यक है।
सच्चर समिति के प्रमुख प्रस्तावः
१ समता मूलक आयोग गठित किया जाये।
२ एक नया विविधता सूचकांक बनाया जाये जिसके आधार पर शिक्षा व रोजगार के अवसर सबको समान रूप से उपलब्ध करवाये जायें।
३ मुस्लिम मदरसों की डिग्रियों को विश्वविद्यालयों द्वारा दी गई डिग्रियों के समान माना जाए।
४ देश में अधिक से अधिक उर्दू माध्यम वाले स्कूल खोले जाँए।
५ एक राष्ट्रीय डाटा बैंक बनाया जाये।
६ मुसलमानों के विकास के कामों पर निगरानी के लिए एक स्वायत्त आकलन एवं निगरानी प्राधिकारण बनाया जाये।
७ दलित ओर पिछड़े वर्ग के मुसलमानों को आरक्षण दिया जाए।
८ आन्ध्र प्रदेश के समान स्थानीय निकायों में अल्पसंख्यकों को समुचित प्रतिनिधत्व देने के लिए प्रत्येक राज्य में ऐसा कानून बनाया जाए।
९ अल्पसंख्यकों को स्वरोजगार की व्यवस्था के लिए वित्तीय सहायता देने वाली वित्तीय संस्थाएं स्थापित की जाएं।
१० मदरसों को उच्च मायमिक शिक्षा से जोड़ा जाए जिससे कि मदरसा छात्रों को मुख्य शिक्षा धारा का लाभ उठाने में कठिनाई न हों।
११ दलित मुसलमानों को अनुसूचित जातियों में सम्मिलित किया जाए और उन्ही के समान आरक्षण इन मुसलमानों को भी दिया जाये।
१२ पिछड़ी मुस्लिम जातियों को हिन्दुओं की पिछड़ी जातियों के समान आरक्षण की व्यवस्था की जाए।
१३ मुसलमानों की उनकी जनसंख्या के अनुपात से शिक्षण संस्थाओं सरकारी नौकरियों, सेना व पुलिस में भर्ती की जाये।
१४ मुसलमानों को संसद व विधान सभाओं में भी आरक्षण दिया जाये। (सच्चर समिति के सन्दर्भ में मौलाना मदनी, देवबन्दी)।
सच्चर समिति पर पक्ष-विपक्ष में नेताओं व बुद्धिजीवियों के विचारः
श्री योगेन्द्र मकवाना (पूर्व ग्रहराज्य मंत्री एवं गुजारात कांग्रेस के वरिष्ठ नेता) का कहना है कि जब मुस्लिम समाज में वर्ण-व्यवस्था व छुआछूत ही नहीं है तो फिर मुसलमानों को दलितों के आरक्षण में भागीदार बनाना सरासर गलत है। (पंजाब केसरी, ११ दिसम्बर २००६)

२००१ की जनगणना के अनुसार भारत में मुस्लिम जनंसख्या १३-४२ प्रतिशत है जबकि उत्तर प्रदेश में यह प्रतिशत १८-५ है। १९५१ से २००१ तक हिन्दू जनसंख्या ९ प्रतिशत घटी जबकि मुस्लिम जनसंख्या ३ प्रतिशत बढ़ी। १९५१ में हिन्दू ८७-२४ प्रतिशत व मुस्लिम १०-४३ प्रतिशत थे। २००१ में हिन्दू ८४-१२ प्रतिशत ओर मुस्लिम १३-४२ प्रतिशत हो गए। 

इन आंकड़ो और "वृद्धि" दर से साफ़ है की "मुस्लिम" अब अल्पसंख्यक नहीं रहे ...उन्हें भी इस "असंवैधानिक विधेयक" में "बहुसंख्यक" माना जाये.




 

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