घनघोर अंधेरा-भयावह सुरंग फिर भी यहां खिंचे चले आते हैं लोग!
जम्मू एक मीटर चौड़ी ,200 मीटर लंबी और दो या तीन मीटर ऊंची इस गुफा में अंदर सांसे तक थम जाती हैं। जरा इस वीडियो को ध्यान से देखें। गहरी आस्था है जो इन्हें इस गुफा को पार कराती है। भक्ति का भाव, दिल में गहरा विश्वास ही भोले भंडारी तक इन्हें पहुंचाता है। इस प्राकृतिक गुफा में एक शिवलिंग है। जो करीब चार मीटर का है।
एक बार में करीब 300 भक्त ही गुफा में प्रवेश कर पाते हैं। कई जगह काफी संकरी है। एक ब्यक्ति का निकलना बहुत मुश्किल है। बताते हैं कि गुफा के अंदर एक ऐसी जगह है जहां से अमरनाथ गुफा तक जाया जा सकता है। लेकिन फिलहाल इसे बंद कर दिया गया है। क्योंकि कुछ साधु इसमें गए और कभी लौट कर नहीं आ पाए। तब से इसे बंद कर दिया गया है। गुफा के अंदर कई प्राकृतिक चीजें हैं। इसके अंदर मां पार्वती, गणेश जी और नंदीग्राम हैं। गुफा की छत पर सांप की आकृति बनी हुई है।
प्रसिद्ध गुफा शिवखेड़ा उद्धमपुर जिले में स्थित है। रैंसा नामक गांव में स्थित इस तीर्थस्थान तक पहुंचने के लिए कम से कम 3 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। जम्मू से करीब 140 किलोमीटर, कटरा से करीब 80 किलोमीटर दूर है।
जम्मू एक मीटर चौड़ी ,200 मीटर लंबी और दो या तीन मीटर ऊंची इस गुफा में अंदर सांसे तक थम जाती हैं। जरा इस वीडियो को ध्यान से देखें। गहरी आस्था है जो इन्हें इस गुफा को पार कराती है। भक्ति का भाव, दिल में गहरा विश्वास ही भोले भंडारी तक इन्हें पहुंचाता है। इस प्राकृतिक गुफा में एक शिवलिंग है। जो करीब चार मीटर का है।
एक बार में करीब 300 भक्त ही गुफा में प्रवेश कर पाते हैं। कई जगह काफी संकरी है। एक ब्यक्ति का निकलना बहुत मुश्किल है। बताते हैं कि गुफा के अंदर एक ऐसी जगह है जहां से अमरनाथ गुफा तक जाया जा सकता है। लेकिन फिलहाल इसे बंद कर दिया गया है। क्योंकि कुछ साधु इसमें गए और कभी लौट कर नहीं आ पाए। तब से इसे बंद कर दिया गया है। गुफा के अंदर कई प्राकृतिक चीजें हैं। इसके अंदर मां पार्वती, गणेश जी और नंदीग्राम हैं। गुफा की छत पर सांप की आकृति बनी हुई है।
प्रसिद्ध गुफा शिवखेड़ा उद्धमपुर जिले में स्थित है। रैंसा नामक गांव में स्थित इस तीर्थस्थान तक पहुंचने के लिए कम से कम 3 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। जम्मू से करीब 140 किलोमीटर, कटरा से करीब 80 किलोमीटर दूर है।
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